
आज बिहार की 121 सीटों पर पहले चरण का मतदान हो रहा है — और इस बार 14 लाख नए वोटर अपनी उंगली पर स्याही लगवाने जा रहे हैं। मगर असली सवाल स्याही का नहीं, सोच का है — क्या युवा “रोजगार” के नाम पर वोट देंगे या “वायदे” के नाम पर?
रोजगार बनाम पलायन: बिहार के यंगिस्तान का डबल-टेस्ट
बिहार का युवा अब TikTok पर नहीं, EVM पर एक्टिव है। 14 लाख नए वोटर में से ज्यादातर के एजेंडा में हैं – नौकरी, पलायन और “कब तक दिल्ली-दुबई भागेंगे?” पिछले पांच साल में गांवों के चाय ठेलों से लेकर पटना की सड़कों तक, सबसे बड़ा इश्यू यही रहा – काम कहां है भाई?
तेजस्वी यादव: “मैं भी युवा हूं, मुझ पर भरोसा करो!”
आरजेडी के सीएम फेस तेजस्वी यादव खुद को “नौजवान नेता” बताकर पूरे जोश में हैं। पटना मरीन ड्राइव पर उनका डांस वीडियो वायरल हुआ, और युवाओं में चर्चा भी – “सीएम बने तो शायद DJ पार्टी फ्री में मिले!”
लेकिन क्या सिर्फ डांस और डायलॉग से रोजगार मिलेगा?
युवाओं के मन में सवाल, पर जवाब का इंतज़ार 14 नवंबर को।
प्रशांत किशोर: Campaign से ज़्यादा, Classroom वाला मूड
पहली बार चुनावी मैदान में उतरे PK यानी प्रशांत किशोर, युवाओं के बीच अपना पॉलिटिकल “Start-up” चला रहे हैं। रैली में युवाओं से सीधी बात – “हम नौकरी देंगे, नहीं तो आप सवाल पूछो!” मतलब ये कि PK का स्टाइल साफ है — क्लासरूम पॉलिटिक्स, बोर्ड पर लिखा “रोजगार” और पीछे खड़ी जनता की उपस्थिति दर्ज।
चिराग पासवान: “Bihari First” का स्वैग
एनडीए की तरफ से चिराग पासवान इस बार अपने Bihari First नारे के साथ चमक रहे हैं। केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद उन्होंने कहा – “दिल तो मेरा पटना में ही बसता है।” कई युवाओं के लिए वो “मेट्रो में बिहारी फेस” हैं जो अब बिहार में “मेकओवर” चाहते हैं।
युवा वोटर सोच रहा है – “क्या चिराग की रोशनी बिहार की सड़कों तक पहुंचेगी?”
वोटर लिस्ट और आंकड़े: Democracy in Numbers
चुनाव आयोग ने इस बार विशेष पुनरीक्षण (SIR) के बाद नई वोटर लिस्ट जारी की —
कुल वोटर: 7.41 करोड़
पुरुष वोटर: 3.92 करोड़
महिला वोटर: 3.49 करोड़
नए युवा वोटर: 14 लाख

बिहार में ये आंकड़ा सिर्फ नंबर नहीं, सरकार बदलने की ताकत है।
हर नेता के पोस्टर पर “युवा बिहार, नया बिहार” लिखा है, पर नौजवान पूछ रहा है — “भैया, पोस्टर छपवाने के बजट से ही कुछ रोजगार दे दो!”
अब आगे क्या?
14 नवंबर को नतीजे आएंगे और बिहार को नई सरकार मिलेगी — पर युवाओं की उम्मीद यही है कि अगली बार जब वोट डालें, तो “रोजगार” वादा नहीं, रिपोर्ट कार्ड में दिखे।
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